अपनी रोटी बदलें ! बाजरा मक्का गैहुँ की रोटी खाने के फायदे और नुकसान रोटी बनाने, खाने का सही तरीका, रोटी के फायदे, रोटी के नुकसान स्वाद के साथ ही अब सेहत को लेकर जागरूकता बढ़ रही है .शहरी समाज अब गेहुँ के आटा के साथ जौ,चना ,मक्का और बाजरा के आटें पर भी जोर देने लगा है .पर आटा बनाने और बेचने वाली कंपनियां इसमें जो घालमेल कर रही हैं उसे जरुर समझना चाहिए .बाजार का पैकेट वाला मल्टीग्रेन आटा आपको वह सब भी खिला दे रहा है जिसकी आपको कोई जरुरत नहीं है .दूसरे इसमें गेंहू का आटा और दूसरे आटा का अनुपात क्या हो यह भी ध्यान नहीं रखा जाता .गेंहू के आटा में दूसरे अन्न का आटा चौथाई हिस्से से ज्यादा न मिलाएं .दूसरे सोयाबीन जैसे हाई प्रोटीन से बचे इसका आटा सभी को रास आ जाए यह जरुरी नहीं .यूपी बिहार में लोग जौ और चने का आटा इस्तेमाल करते रहें है .पर पंजाब से जबसे सरसों का साग और मक्के की रोटी का प्रचलन बढ़ा है मक्का भी खूब इस्तेमाल किया जाता है .पंजाब के किसानो के लिए यह ठीक है पर अपने तरफ चावल का इस्तेमाल ज्यादा होता है जिससे का मक्का इस्तेमाल शुगर वालों के लिए ठीक नहीं .इस ज...
गाँव में तो डिप्रेशन को भी डिप्रेशन हो जायेगा। उम्र 25 से कम है और सुबह दौड़ने निकल जाओ तो गाँव वाले कहना शुरू कर देंगे कि “लग रहा सिपाही की तैयारी कर रहा है " फ़र्क़ नही पड़ता आपके पास गूगल में जॉब है। 30 से ऊपर है और थोड़ा तेजी से टहलना शुरू कर दिये तो गाँव में हल्ला हो जायेगा कि “लग रहा इनको शुगर हो गया " कम उम्र में ठीक ठाक पैसा कमाना शुरू कर दिये तो आधा गाँव ये मान लेगा कि आप कुछ दो नंबर का काम कर रहे है। जल्दी शादी कर लिये तो “बाहर कुछ इंटरकास्ट चक्कर चल रहा होगा इसलिये बाप जल्दी कर दिये " शादी में देर हुईं तो “दहेज़ का चक्कर बाबू भैया, दहेज़ का चक्कर, औकात से ज्यादा मांग रहे है लोग " बिना दहेज़ का कर लिये तो “लड़का पहले से सेट था, इज़्ज़त बचाने के चक्कर में अरेंज में कन्वर्ट कर दिये लोग" खेत के तरफ झाँकने नही जाते तो “बाप का पैसा है " खेत गये तो “नवाबी रंग उतरने लगा है " बाहर से मोटे होकर आये तो गाँव का कोई खलिहर ओपिनियन रखेगा “लग रहा बियर पीना सीख गया " दुबले होकर आये तो “लग रहा सुट्टा चल रहा " कुलमिलाकर गाँव के माहौल में बहुत मनोर...